शनिवार, फ़रवरी 19, 2005

अज्ञेय

(७ मार्च १९११ - ४ अप्रैल १९८७)

अज्ञेय जी की कविता सागर पर प्रेषित हुई रचनाएँ :

सवेरे उठा तो धूप खिली थी
नया कवि : आत्म-स्वीकार
देखिये न मेरी कारगुज़ारी
सत्य तो बहुत मिले
चाँदनी जी लो
मैंने आहुति बन कर देखा

3 टिप्पणियाँ:

1:18 pm पर, Blogger JASWIR ने कहा ...

koi ageya ki kavia sahbad post kar sakta hai??????????

 
1:19 pm पर, Blogger JASWIR ने कहा ...

shabad kavita ki sakth jarorat hai!!!

 
1:20 am पर, Blogger Munish ने कहा ...

http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6_%E0%A4%94%E0%A4%B0_%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF_/_%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A5%87%E0%A4%AF

 

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