कहते हैं, तारे गाते हैं
कहते हैं, तारे गाते हैं ।
सन्नाटा वसुधा पर छाया,
नभ में हमने कान लगाया,
फिर भी अगणित कंठों का यह राग नहीं हम सुन पाते हैं ।
कहते हैं, तारे गाते हैं ।
स्वर्ग सुना करता यह गाना,
पृथ्वी ने तो बस यह जाना,
अगणित ओस-कणों में तारों के नीरव आँसू आते हैँ ।
कहते हैं, तारे गाते हैं ।
ऊपर देव, तले मानवगण,
नभ में दोनों गायन-रोदन,
राग सदा ऊपर को उठता, आँसू नीचे झर जाते हैं ।
कहते हैं, तारे गाते हैं ।
- हरिवंशराय बच्चन


6 टिप्पणियाँ:
अच्छी लगी बच्चन जी की ये कविता !
ये भी बढिया है
बहुत बडिया है..
येह मेरी favt कविता है.. :)
कहते हैं, तारे गाते हैं ।
कितना कहा पर सुना नही , ये दोष तारों का नही
मानस ही हैं जो सुनते नही |
बहुत ख़ूब कही है बचन साहब ने
iss se khoobsoorat rachna ho hi nahi sakti... taaron ke geet per
Wah !bahut bahut Achi hai
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