सोमवार, सितंबर 18, 2006

दुष्यन्त कुमार

दुष्यन्त कुमार जी की कविता सागर पर प्रेषित हुई रचनाएँ :

मत कहो, आकाश में कुहरा घना है
बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं
अपाहिज व्यथा
पर्वत-सी पीर