बुधवार, जून 09, 2004

जी-मेल

मित्रो,

गूगल ई-मेल अथवा 'जी-मेल' के विषय में तो आपने अवश्य सुना होगा, अगर नहीं तो आप यहां उसके बारे में पढ सकतें हैं । जी-मेल की सदस्यता अभी केवल निमन्त्रण द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है । यूँ तो वेब पर कई जगह ऎसे निमन्त्रण उपलब्ध हैं, परन्तु अगर आप कुछ उन लोगों में से हैं जिन्हे यह अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है और निमन्त्रण चाहते हैं, तो हिन्दी कविता पर अपने हाथ आज़मायें । अपनी मौलिक कविता munish को जी-मेल डॉट कॉम पर भेजें । सबसे अच्छी रचना को 'कविता सागर' की एक प्रविष्टी में प्रेषित किया जायेगा एवं पुरस्कार स्वरूप एक जी-मेल निमन्त्रण भेजा जायेगा । वैसे कविता सृजन का आनन्द किसी जी-मेल का मोहताज नहीं है, किन्तु कदाचित इस बहाने से आप , जो अब तक इस आनन्द रस में डुबकी लगाने से कतरा रहे थे, इस अमृत सागर में छ्लांग लगा ही दें ।

आपका मित्र कवितारसिक,
मुनीश

4 टिप्पणियाँ:

11:35 am पर, Anonymous बेनामी ने कहा ...

प्रिय मित्र मुनीश,

तुम्हारी हिन्दी इतनी सुन्दर होगी, येह मालुम न था. जानकर प्रसन्नता हुई । लगे रहो..

सुरम्य

 
11:55 am पर, Anonymous बेनामी ने कहा ...

bahut khoob.. Jawaab nahi aapka -
aapka mitra eVam shubh-chintak, Ravinder Pal

 
7:17 pm पर, Blogger Mihir ने कहा ...

अरे मुनीश ,
आमच्यासारख्या मराठी माणसान्नी कशा काय वाचाव्यात बरे हिन्दी कविता? का अशा लिन्क्स पाठवतोस?
मिहिर

 
1:23 am पर, Blogger The Critical Thinker ने कहा ...

dear munish ji,

agar kisi ke pass mail account, nahi hai to vo aapke gmail account pe kaise kavita bhej sakta hai

 

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