tag:blogger.com,1999:blog-7203744.post-1158452429982735422006-09-16T20:19:00.000-04:002006-09-17T13:50:49.473-04:00तुम तूफान समझ पाओगे ?तुम तूफान समझ पाओगे ?<br /><br />गीले बादल, पीले रजकण,<br />सूखे पत्ते, रूखे तृण घन<br />लेकर चलता करता 'हरहर'--इसका गान समझ पाओगे?<br />तुम तूफान समझ पाओगे ?<br /><br />गंध-भरा यह मंद पवन था,<br />लहराता इससे मधुवन था,<br />सहसा इसका टूट गया जो स्वप्न महान, समझ पाओगे?<br />तुम तूफान समझ पाओगे ?<br /><br />तोड़-मरोड़ विटप-लतिकाएँ,<br />नोच-खसोट कुसुम-कलिकाएँ,<br />जाता है अज्ञात दिशा को ! हटो विहंगम, उड़ जाओगे !<br />तुम तूफान समझ पाओगे ?<br /><br />- <a href="http://hindipoetry.blogspot.com/2005/02/blog-post_110884451797336310.html">हरिवंशराय बच्चन</a>Munishhttp://www.blogger.com/profile/01237020444765003132noreply@blogger.com